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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Sunday, March 17, 2013

आओ राष्ट्रहित में हम सब माफ़ी मागे!

आओ राष्ट्रहित में  माफी मांगने का सिलसिला शुरू करते हैं |
२००२ तो बहुत बाद में आया, उससे पहले से शुरू करते हैं |
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तीस्ता सीतलवाड़ माफी मांगो सन 715 के लिए जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर बेवजह हमला किया |

जावेद आनंद माफी मांगो सन 1001-1027 के लिए जब महमूद गजनवी ने भारत वर्ष पर 17 बार हमला किया | मंदिरों को लूटा और लाखों हिन्दुओं का कत्ल किया |

शबनम हाशमी माफी मांगो सन 1175 से 1197 के लिए जब मुहम्मद गोरी ने सिंध, ग्वालियर, गुजरात, बनारस और अजमेर पर रक्त रंजित हमला किया |

शाजिया इल्मी माफी मांगो सन 1193 के लिए जब मुहम्मद खिलजी ने बिहार पर हमला करके खून की नदियाँ बहाई | माफी मांगो सन 1199 से 1202 के लिए जब खिलजी ने बंगाल को तहस नहस किया | रणथम्बोर, अजमेर, जालोर, नागौर , ग्वालियर, बदायूं, कन्नौज और बनारस को लूटा |

अरुंधती रॉय माफी मांगो 1297 के लिए जब अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात पर हमला किया | माफी मांगो 1301 के लिए जब इसने रणथम्बोर के राजा हमीर देव की हत्या की | माफी मांगो 1305 के लिए लिए जब इस शैतान ने रानी पद्मिनी को जौहर करने के लिए मजबूर किया |

मेधा पाटकर माफी मांगो 1326 के लिए जब फिरोज तुगलक ने ज्वालामुखी मंदिर को ध्वस्त किया | माफी मांगो 1360 के लिए जब इसने जाज नगर के जगन्नाथ पूरी मन्दिर को नष्ट किया |

प्रशांत भूषण माफी मांगो 1527 के लिए जब बाबर ने बहराइच, सियालकोट, रणथमबौर और बिहार पर हमला किया |

नंदिता दास माफी मांगो 1555 के लिए जब हुमायूं ने दिपालपुर और लाहौर पर हमला किया |

जावेद अख्तर माफी मांगो 1589 के लिए जब अकबर ने बंगाल, गुजरात और कश्मीर पर हमला किया |

मुलायम सिंह माफी मांगो औरंगजेब के शासन काल के लिए जिसने लाखों हिन्दुओं का कत्ल किया और मंदिरों को नष्ट किया | जिसने हिन्दुओं को इस्लाम और जिन्दगी में से एक चुनने के लिए मजबूर किया | जिसने गुरु तेगबहादुर का कत्ल किया |

लालू माफी मांगो नोआखली में हिन्दुओं के नरसंहार के लिए |

सेकुलरों माफी मांगो मोपला में हिन्दुओं के सुनियोजित क़त्ल के लिए | और अभी हाल में उत्तर प्रदेश के कोसीकलां, प्रतापगढ़, इलाहबाद में हिन्दुओं के कत्ल के लिए 


मोदी माफ़ी मांगे २००२ में जो कुछ भी हुआ उसके लिए.

Monday, March 11, 2013

अगर सेक्युलर का मतलब ...........मै सेक्युलर नहीं हूँ.


अगर सेक्युलर होने का मतलब हिन्दू विरोध है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर होने का मतलब मुस्लिम तुष्टीकरण हैं तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर होने का मतलब गोधरा को अनदेखा करके गुजरात पर रोना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब हज पर सब्सिडी और अमरनाथ,वैष्णोदेवी और कुम्भ यात्राओं पर टेक्स लगाना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब अरबी भाषा के विकास  के लिए अनुदान देना और संस्कृत भाषा की अनदेखी करना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब "सिर्फ मुस्लिम लड़कियां ही मेरी बेटियां हैं"कहना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.
अगर सेक्युलर का मतलब ४०% लैपटॉप १५% मुस्लिम विद्यार्थियों को देना है,न की ८५% अन्य विद्यार्थियों को,तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब जामा मस्जिद का ४ करोड़ का बिल माफ़ करना और आम गरीब आदमी की बिजली १५५ रुपये के बकाये के लिए काट देना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब मुग़लों के हर छोटी से छोटी इमारतों को बचाना और लाखों साल पुराने रामसेतु को तोडना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब शहीदों के सर को कटवाने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को भोज देना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब २४ परगना में हुए हिन्दुओं के ऊपर बर्बर हमलों को मीडिया में नहीं आने देना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब वन्देमातरम का विरोध करने वालों का साथ देना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब तिरंगे का अपमान करने वालों का साथ देना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब डीडी नेशनल के लोगों से "सत्यम शिवम् सुन्दरम" हटाना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ.

अगर सेक्युलर का मतलब हिन्दुओं को आतंकवादी और हाफिज सईद को सम्माननीय शब्दों से संबोधित करना है तो मै सेक्युलर नहीं हूँ..
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.अगर सेक्युलर का मतलब ...........मै सेक्युलर नहीं हूँ. 

Tuesday, February 26, 2013

केजरीवाल की महत्वाकांक्षा और बुजुर्ग की भविष्यवाणी



मित्रों!जब पहली बार अन्ना ने जंतर-मंतर पर लोकपाल ले लिए अनशन किया था,तभी से मै हमेशा उनके समर्थन में जाता रहा.उसके बाद रामलीला मैदान हो या अन्ना के जेल के अन्दर तीन दिन का अनशन.मै अपने नौकरी से छुट्टी लेकर रात दिन उनके समर्थन में खड़ा रहता था.मै अन्ना के साथ केजरीवाल के बातों से भी बहुत प्रभावित था.रामलीला मैदान में एक बुजुर्ग व्यक्ति जो हमेशा गाँधी जी की वेश भूषा में आते थे, ने मुझे बताया था की अरविन्द एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति प्रतीत होता है,मुझे लगता है की अपना स्वार्थ पूरा करने के बाद ये अन्ना जी को छोड़ देगा.उस समय उसकी बात मुझे बहुत बुरी लगी थी और मैंने उनसे बाद विवाद भी किया.अंततः उनकी बात अक्षरशः सत्य हुई,अरविन्द ने अन्ना का उसे किया और खुद को पापुलर,और एक नयी पार्टी बना कर खुद की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लग गया.
आज मै उन बुजुर्ग को याद कर रहा हूँ,और किसी तरह अगर मेरी बात उनतक पहुच जाये तो,क्षमा मांगना चाहता हूँ अपने उस नासमझी के लिए.
आखिर तजुर्बा बोलता है,अरविन्द की अन्ना चापलूसी समजने में हमें इतने दिन लग गए और उन्होंने प्रथम दृष्टया ही पहचान लिया.